Now Guillain-Barré Syndrome Outbreak in Maharashtra: What You Need to Know

Guillain-Barré Syndrome

महाराष्ट्र में Guillain-Barré Syndrome का प्रकोप: जानने योग्य बातें

परिचय

Guillain-Barré Syndrome (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से परिधीय नसों (नर्व्स) पर हमला करती है। इससे मांसपेशियों में कमजोरी, रिफ्लेक्सेज की कमी और गंभीर मामलों में पक्षाघात (paralysis) हो सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र में GBS के मामलों में तेजी आई है, जहां पांच नए संदिग्ध मामलों के साथ कुल 163 मामले सामने आए हैं। इनमें से 127 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, और 5 मौतें दर्ज की गई हैं।

मामलों में बढ़ोतरी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं को जन्म दिया है, जिससे संभावित कारणों की जांच हो रही है, जैसे कि दूषित पानी। कई मरीज गंभीर स्थिति में हैं, इसलिए GBS को समझना, इसके लक्षण, उपचार और रोकथाम के उपाय जानना आवश्यक है।

Guillain-Barré Syndrome(GBS) क्या है?

Guillain-Barré Syndrome (GBS) एक ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की परिधीय नसों पर हमला करती है, जिससे कमजोरी बढ़ती जाती है और कुछ मामलों में पूर्ण पक्षाघात हो सकता है। इस बीमारी का सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन यह अक्सर संक्रमण, सर्जरी या टीकाकरण के बाद विकसित होता है।

Guillain-Barré Syndrome के प्रकार

Guillain-Barré Syndrome के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो नसों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं:

  1. एक्यूट इंफ्लेमेटरी डिमायलिनेटिंग पॉलीन्यूरोपैथी (AIDP): यह सबसे आम प्रकार है, जिसमें कमजोरी पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर फैलती है।
  2. मिलर फिशर सिंड्रोम (MFS): इसमें आंखों की मांसपेशियों में लकवा, संतुलन की समस्या और रिफ्लेक्सेज की कमी होती है।
  3. एक्यूट मोटर एक्सोनल न्यूरोपैथी (AMAN) और एक्यूट मोटर-सेंसरी एक्सोनल न्यूरोपैथी (AMSAN): ये प्रकार मुख्य रूप से एशिया में देखे जाते हैं और नसों को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं।

कारण और जोखिम कारक

Guillain-Barré Syndrome के सामान्य ट्रिगर (उत्तेजक कारक)

  • संक्रमण:
    • कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी (प्रदूषित भोजन, विशेष रूप से कच्चे या अधपके चिकन में पाया जाने वाला बैक्टीरिया)
    • इन्फ्लूएंजा वायरस
    • साइटोमेगालोवायरस (CMV)
    • एप्सटीन-बार वायरस (EBV)
    • ज़िका वायरस
    • हेपेटाइटिस वायरस
    • एचआईवी (HIV)
  • हाल ही में हुई सर्जरी या टीकाकरण (दुर्लभ मामलों में, फ्लू या COVID-19 वैक्सीन के बाद भी GBS देखा गया है)
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति (यदि परिवार में ऑटोइम्यून रोगों का इतिहास हो)

जोखिम में कौन हैं?

  • 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग
  • पुरुषों में GBS विकसित होने की संभावना अधिक होती है
  • हाल ही में संक्रमण या सर्जरी से उबर रहे लोग

Guillain-Barré Syndrome के लक्षण

GBS के लक्षण तेजी से विकसित होते हैं, आमतौर पर संक्रमण या अन्य ट्रिगरिंग घटना के कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर।

प्रारंभिक लक्षण

  • पैरों और तलवों में झनझनाहट या कमजोरी, जो ऊपर की ओर फैलती है
  • चलने या संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
  • हाथों और पैरों में संवेदनशीलता की कमी
  • विशेष रूप से कमर के निचले हिस्से में दर्द

गंभीर लक्षण

  • बोलने या निगलने में कठिनाई
  • चेहरे की मांसपेशियों की कमजोरी
  • रिफ्लेक्सेज का कम होना या समाप्त हो जाना
  • मूत्राशय और मलाशय को नियंत्रित करने में कठिनाई

गंभीर मामलों में

  • पूर्ण पक्षाघात (कुछ मामलों में श्वसन मांसपेशियों तक फैल सकता है)
  • सांस लेने में कठिनाई, जिसके लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता हो सकती है
  • हृदय गति और रक्तचाप में असंतुलन

महाराष्ट्र में GBS के मामले: वर्तमान स्थिति

महाराष्ट्र, विशेष रूप से पुणे और आसपास के क्षेत्रों में GBS के मामलों में वृद्धि देखी गई है। प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि यह प्रदूषित पानी से जुड़ा हो सकता है।

वर्तमान आँकड़े (फरवरी 2025 तक):

  • 163 संदिग्ध मामले
  • 127 मामलों की पुष्टि
  • 5 मौतें दर्ज
  • 47 मरीज ICU में
  • 21 वेंटिलेटर पर

स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया संक्रमण के संकेत मिले हैं।

निदान और उपचार-

Guillain-Barré Syndrome

GBS का निदान कैसे किया जाता है?

  • नर्व कंडक्शन स्टडी (NCS): नसों में विद्युत गतिविधि मापता है।
  • लंबर पंचर (स्पाइनल टैप): द्रव में प्रोटीन के उच्च स्तर की जांच करता है।
  • इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG): नसों और मांसपेशियों की प्रतिक्रिया का परीक्षण करता है।

Guillain-Barré Syndrome के उपचार विकल्प

GBS का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन जल्दी इलाज से लक्षणों में सुधार और रिकवरी तेज हो सकती है।

1. प्लाज्मा एक्सचेंज (Plasmapheresis)

हानिकारक एंटीबॉडी को रक्त से निकालने में मदद करता है।

2. इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIG)

स्वस्थ एंटीबॉडी देकर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।

3. सहायक देखभाल

  • गंभीर मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट
  • फिजिकल थेरेपी
  • दर्द प्रबंधन

रोकथाम के उपाय

  1. स्वच्छता बनाए रखें – संक्रमण से बचने के लिए हाथ धोएं।
  2. खाने-पीने की सुरक्षा – ठीक से पका हुआ खाना खाएं और दूषित पानी से बचें।
  3. टीकाकरण के बारे में जागरूक रहें – डॉक्टर से सलाह लें।
  4. लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र में Guillain-Barré Syndrome के बढ़ते मामलों को देखते हुए समय पर पहचान, उपचार और रोकथाम बेहद जरूरी है। यदि किसी को असामान्य कमजोरी या झनझनाहट महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

Guillain-Barré Syndrome से जुड़े पिछले वायरस

Guillain-Barré Syndrome (GBS) अक्सर कुछ विशेष वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों के बाद विकसित होता है। इतिहास में कई ऐसे वायरस देखे गए हैं जो GBS के मामलों से जुड़े रहे हैं। इनमें कुछ प्रमुख वायरस शामिल हैं:

1. कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी (Campylobacter jejuni)

  • यह एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो अधपके या दूषित भोजन (विशेष रूप से चिकन) के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
  • GBS के सबसे आम कारणों में से एक है।
  • यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण (डायरिया, पेट दर्द) का कारण बनता है, जो बाद में GBS को ट्रिगर कर सकता है।

2. इन्फ्लूएंजा वायरस (Influenza Virus)

  • फ्लू वायरस के बाद भी कुछ दुर्लभ मामलों में GBS देखने को मिला है।
  • इन्फ्लूएंजा संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला कर सकती है, जिससे GBS हो सकता है।

3. साइटोमेगालोवायरस (Cytomegalovirus – CMV)

  • यह हर्पीस वायरस फैमिली का हिस्सा है।
  • आमतौर पर यह कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में पाया जाता है।
  • CMV संक्रमण के बाद GBS के कई मामले दर्ज किए गए हैं, क्योंकि यह वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है।

4. एप्सटीन-बार वायरस (Epstein-Barr Virus – EBV)

  • यह वायरस गले में संक्रमण (ग्लैंड फीवर) और मोनोन्यूक्लिओसिस नामक बीमारी का कारण बनता है।
  • EBV संक्रमण के बाद ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया शुरू हो सकती है, जिससे GBS का खतरा बढ़ता है।

5. ज़िका वायरस (Zika Virus)

  • ज़िका वायरस मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से फैलता है।
  • 2015-2016 में ज़िका वायरस के प्रकोप के दौरान, GBS के मामलों में वृद्धि देखी गई
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़िका संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला कर सकती है, जिससे GBS हो सकता है।

6. हेपेटाइटिस वायरस (Hepatitis Virus)

  • हेपेटाइटिस A, B, C और E वायरस के बाद भी कुछ मामलों में GBS की घटनाएं दर्ज की गई हैं
  • ये वायरस लीवर को प्रभावित करते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं, जिससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।

7. एचआईवी (HIV – ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस)

  • HIV संक्रमण से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है
  • कुछ मामलों में, HIV से संक्रमित लोगों में GBS जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं देखी गई हैं

8. कोविड-19 वायरस (COVID-19 – SARS-CoV-2)

  • कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी GBS के कई मामले सामने आए।
  • कोविड संक्रमण के बाद, कुछ मरीजों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं (मस्तिष्क और नसों से जुड़ी समस्याएं) विकसित हुईं।
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 संक्रमण ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकता है, जिससे GBS का खतरा बढ़ सकता है।

Guillain-Barré Syndrome

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