Is the World Facing a New Nuclear Age Under Donald Trump? 2025

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Could President Donald Trump’s Push for New Nuclear Tests Spark a Global Arms Race? 2025


डोनाल्ड ट्रंप की परमाणु परीक्षण की घोषणा से बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में परमाणु हथियारों के नए परीक्षण की मांग ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है। यह प्रस्ताव उन दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय नियंत्रणों को कमजोर कर सकता है, जिन्होंने परमाणु हथियारों के प्रसार और वृद्धि को रोकने में मदद की थी।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि कोई प्रमुख परमाणु शक्ति परीक्षण दोबारा शुरू करती है, तो यह अन्य परमाणु संपन्न देशों में एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया (डोमिनो इफेक्ट) शुरू कर सकता है। इससे एक नई वैश्विक हथियार होड़ छिड़ सकती है और शांति एवं सुरक्षा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय समझौतों को अस्थिर कर सकती है।

वर्षों से, प्रमुख विश्व शक्तियाँ परमाणु परीक्षणों पर रोक (moratorium) का पालन करती रही हैं, ताकि सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को सीमित किया जा सके। लेकिन ट्रंप का रुख इस सहमति को चुनौती देता है और यह आशंका पैदा करता है कि परमाणु निरस्त्रीकरण में हुई दशकों की प्रगति जल्दी ही समाप्त हो सकती है।

जैसे-जैसे विश्व नेता वॉशिंगटन की अगली चाल पर नज़र रख रहे हैं, सवाल यह है — क्या एक निर्णय दुनिया को फिर से खतरनाक परमाणु युग की ओर ले जाएगा?


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शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले ट्रंप ने की परमाणु परीक्षण की घोषणा

29 अक्टूबर 2025 को दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य देशों की तरह परमाणु हथियार परीक्षण दोबारा शुरू करेगा।

एयर फ़ोर्स वन पर वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “हमने कई वर्षों से परीक्षण बंद कर रखे हैं, लेकिन जब अन्य देश अपने कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं, तो हमारा भी ऐसा करना उचित है।”

अमेरिका लौटने के बाद ट्रंप ने अपने बयान को दोहराया और दावा किया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सभी परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते।

ट्रंप के ये बयान इस बात का संकेत हैं कि वॉशिंगटन दशकों से चले आ रहे परमाणु परीक्षण पर रोक को समाप्त करने पर विचार कर सकता है — ऐसा कदम जो वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।


ट्रंप का परमाणु परीक्षण दावा और बढ़ते वैश्विक तनाव

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना सही है कि उत्तर कोरिया ने 21वीं सदी में कई परमाणु परीक्षण किए हैं। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस ने 1990 के दशक से पूर्ण परमाणु विस्फोट परीक्षणों पर रोक बनाए रखी है।

इन देशों ने हाल के वर्षों में परमाणु विस्फोट नहीं किए, लेकिन उन्होंने न्यूक्लियर वारहेड ले जाने में सक्षम मिसाइल और हथियार प्रणालियाँ विकसित और परीक्षण की हैं।

ट्रंप का यह बयान तब आया जब रूस ने दो अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों — बुरेवेस्टनिक (Burevestnik) परमाणु-संचालित क्रूज़ मिसाइल और पोसीडॉन (Poseidon) पानी के भीतर चलने वाली टॉरपीडो — के सफल परीक्षण की घोषणा की। दोनों हथियार अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को पार करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और इनमें परमाणु वारहेड लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने हालांकि स्पष्ट किया कि इन परीक्षणों में वास्तविक परमाणु विस्फोट शामिल नहीं थे।

रूस की घोषणा के बाद ट्रंप के इन बयानों ने वैश्विक हथियार प्रतिस्पर्धा और परमाणु प्रतिरोध (deterrence) के भविष्य पर नई बहस छेड़ दी है।


संयुक्त राज्य अमेरिका ने दक्षिण सूडान के लिए अस्थायी सुरक्षा स्थिति समाप्त की

संयुक्त राज्य अमेरिका ने दक्षिण सूडान (South Sudan) के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (Temporary Protected Status – TPS) समाप्त करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत दक्षिण सूडान के नागरिकों को अमेरिका में कानूनी रूप से रहने और काम करने की अनुमति दी गई थी।

यह निर्णय एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत देता है, क्योंकि TPS ने वर्षों से सशस्त्र संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से भागे दक्षिण सूडान के नागरिकों को मानवीय राहत दी थी। अब इस कार्यक्रम की समाप्ति के साथ, हजारों लोगों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के अनुसार, यह निर्णय 5 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। विभाग ने एक बयान में कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम (Kristi Noem) ने विभिन्न एजेंसियों से परामर्श के बाद तय किया कि दक्षिण सूडान की मौजूदा परिस्थितियाँ अब TPS की कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करतीं।

DHS ने यह भी बताया कि जो दक्षिण सूडानी नागरिक कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ऐप के माध्यम से स्वेच्छा से वापसी की सूचना देंगे, उन्हें नि:शुल्क उड़ान, $1,000 का प्रस्थान बोनस, और भविष्य में कानूनी इमिग्रेशन अवसरों के लिए पात्रता मिल सकती है।


दक्षिण सूडान की नाजुक राजनीतिक स्थिति

दक्षिण सूडान में 2018 के शांति समझौते के बावजूद राजनीतिक स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है। राष्ट्रपति सल्वा कीर और उनके पूर्व उपराष्ट्रपति रियेक मचार के बीच तनाव हाल के महीनों में फिर बढ़ गया है। मचार की गिरफ्तारी और देशद्रोह के आरोपों के बाद शांति समझौता कमजोर होता दिख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दक्षिण सूडान अब भी संघर्ष और विस्थापन की स्थिति से जूझ रहा है।


निष्कर्ष

संयुक्त राज्य अमेरिका का यह निर्णय न केवल दक्षिण सूडान के नागरिकों पर असर डालेगा बल्कि अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों की दिशा में भी बदलाव का संकेत है। मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम पर चिंता जताई है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि TPS हमेशा अस्थायी उपाय के रूप में ही लागू किया गया था।


Key Takeaways

  • Termination Date: January 5, 2026
  • Reason: DHS determined South Sudan no longer meets TPS requirements
  • Incentives: $1,000 exit bonus and a complimentary flight for voluntary departures
  • Impact: Thousands of South Sudanese nationals could lose legal status
  • Context: Part of broader U.S. policy shift on humanitarian protections

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